सरस्वती शिशु मंदिर, श्यामडीह में वसंतोत्सव के रंगारंग कार्यक्रमों के साथ कक्षा द्वादश के भैया-बहनों का दीक्षा (विदाई) समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह अवसर उल्लास के साथ-साथ भावनाओं से भी ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ निचितपुर हॉस्पिटल के संस्थापक एवं समाजसेवी डॉ. उमाशंकर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पूजन कर किया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में कोयलांचल विश्वविद्यालय के बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. उपेन्द्र कुमार, गौरीशंकर सिंह एवं असित कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विद्यालय के सचिव श्री विक्रम कुमार राजगढ़िया ने सभी अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं बुके भेंट कर किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अभिमन्यु कुमार ने अतिथियों का परिचय कराते हुए उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि द्वारा स्मृति मंजूषा का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय की बहनों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने वातावरण को मधुर बना दिया, वहीं कक्षा एकादश की बहनों द्वारा प्रस्तुत शिव तांडव नृत्य ने समस्त प्रांगण को भक्तिमय कर दिया और दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।
दीक्षा (विदाई) समारोह के दौरान भैया-बहनों ने अपने विद्यालय जीवन की स्मृतियों को साझा किया। यह क्षण हर्ष और विषाद से युक्त भावुक पल रहा। भैया-बहनों ने सरस्वती शिशु मंदिर, श्यामडीह की संस्कारयुक्त शिक्षा प्रणाली, आचार्यों की निष्ठापूर्ण शिक्षण शैली एवं उनके मार्गदर्शन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की तथा इसे अपने जीवन का सूत्र मानने का संकल्प लिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. उपेन्द्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यह दीक्षा समारोह प्राचीन काल की गुरुकुल परंपरा की याद दिलाता है, जहाँ शिक्षा केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि संस्कारों से युक्त जीवन निर्माण का माध्यम थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा ज्ञान से विज्ञान की ओर उन्मुख होती है और विद्यार्थियों को चाहिए कि वे जहाँ भी जाएँ, अपनी शिक्षा की गुणवत्ता से समाज और राष्ट्र को सुगंधित करें तथा राष्ट्र की चुनौतियों का सामना करते हुए उसे विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर करें।
मुख्य अतिथि डॉ. उमाशंकर सिंह ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर, श्यामडीह से प्राप्त संस्कार और शिक्षा विद्यार्थियों के जीवन में सदैव मार्गदर्शक बने रहेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपने विद्यालय और गुरुओं को कभी नहीं भूलेंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य श्री अभिमन्यु कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थियों ने शिशु मंदिर की गौरवशाली परंपरा में शिक्षा प्राप्त की है, अब उन्हें लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन, परिश्रम और संस्कारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सभी अतिथियों, आचार्य बंधु भगिनी एवं भैया-बहनों के प्रति आभार व्यक्त किया।




